डॉ. शेरोन वासुथेवन

डॉ. शेरोन वासुथेवन लाइफ़ हेल्थकेयर ग्रुप में एक शिक्षा कार्यकारी हैं। नर्सिंग में पीएचडी और पंजीकृत नर्स होने के नाते, उन्होंने विश्वभर में विभिन्न सम्मेलनों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं और नर्सिंग पत्रिकाओं में प्रकाशित किया है। वे नेल्सन मंडेला विश्वविद्यालय में शोध सहयोगी के रूप में मास्टर और डॉक्टरेट उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करती हैं। डॉ. वासुथेवन ने कई नर्सिंग संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाई हैं और वे नर्स नेतृत्व, शिक्षा, गुणवत्ता और स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों में विशेषज्ञता रखती हैं। उन्होंने नर्सिंग कार्यों के स्वचालन से जुड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है और नर्सिंग शिक्षा में ई-लर्निंग को प्राथमिकता दी है।
इस वर्ष इंटरनेशनल काउंसिल फॉर नर्सेस ने अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के लिए एक महत्वपूर्ण विषय चुना है – “हमारी नर्सें, हमारा भविष्य”। यह नर्सिंग पेशे के लिए आत्मचिंतन का एक अहम समय है। इसी सोच ने मुझे इस संपादकीय का शीर्षक देने को प्रेरित किया।
नर्सिंग : कल
हमसे पहले की नर्सिंग नेतृत्व की महिलाएँ साहस, सशक्तिकरण और स्त्रियों एवं नर्सों की स्थिति को ऊँचा उठाने पर केंद्रित थीं। हालांकि, यह पूरी तरह समावेशी नहीं था। उस समय नर्सिंग एक अधीनस्थ पेशा था – नर्सें डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करती थीं और उनके पास बहुत कम स्वायत्तता थी।
फिर भी, नैदानिक कार्य उत्कृष्ट था। भले ही यह साक्ष्य-आधारित न हो, नर्सें अपनी परिस्थितियों में अपनी पूरी क्षमता के साथ रोगियों की देखभाल करती थीं। मैट्रन बहुत ही शक्तिशाली और कई स्तरों पर अधिनायकवादी होती थीं। अनुशासन नर्सिंग पेशे में बने रहने की मूल शर्त था।
- वर्दी सफेद और कड़क इस्त्री की हुई होती थी।
- नर्सिंग कैप बालों को संभालने के लिए पहनी जाती थी, जो बाद में मात्र सजावटी और छोटी हो गई।
- काम के घंटे लंबे थे। वरिष्ठ नर्सें बताती थीं कि उन्हें 12 दिन लगातार काम करने के बाद ही एक सप्ताहांत की छुट्टी मिलती थी।
- प्रशिक्षण बेहद सख्त था। कई स्तरों पर दंड दिए जाते थे।
- केवल 3 महीने की ट्रेनिंग के बाद प्रारंभिक परीक्षा होती थी। असफल होने वालों को तुरंत निकाल दिया जाता था। यह “खराब सेबों” को जल्दी पहचानने का तरीका था।
यह सब भले ही आज पुराना या सख्त लगे, लेकिन इसने नर्सिंग पेशे की मजबूत नींव रखी। नर्सें अपनी देखभाल और करुणा के लिए जानी जाती थीं। यही वजह है कि उन्हें “लेडीज़ विद द लैम्प” कहा गया।
नर्सिंग : आज
आज महिलाएँ स्वतंत्र हैं, वरिष्ठ भूमिकाओं में हैं और नेतृत्व कर रही हैं। लेकिन समाज में क्या उन्हें पूरी तरह स्वीकार किया गया है? क्या हमें वास्तव में लैंगिक समानता मिली है?
आज का परिदृश्य बदल चुका है:
- लोग और समुदाय मूल्य और गुणवत्ता की अपेक्षा करते हैं और असंतोष सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते हैं।
- नर्सिंग गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
- नर्सिंग नेतृत्व अब नवाचार, वैश्वीकरण, शोध और परिवर्तन पर आधारित है।
- नर्सें अब विश्वविद्यालयों में डीन, डिप्टी वाइस चांसलर और वाइस चांसलर जैसे उच्च पदों तक पहुँची हैं।
शिक्षा और प्रैक्टिस में बदलाव
- पहले की तरह “क्योंकि मैंने कहा है” वाला दृष्टिकोण अब काम नहीं करता।
- आज की नर्सें प्रोटोकॉल और डॉक्टरों के आदेशों पर सवाल उठाती हैं।
- वे बहु-विषयक टीम का हिस्सा बनकर योगदान देना चाहती हैं।
- हालाँकि, प्रतिकूल घटनाओं की संख्या भी बढ़ी है। शायद इसका कारण बेहतर निगरानी और रिकॉर्डिंग है।
- फिर भी, नैदानिक दक्षता पर सवाल उठते हैं और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षित रोगी देखभाल दी जाए।
शिक्षा प्रणाली
- नर्सिंग कॉलेजों के जरिए शिक्षा लंबे समय से चल रही है।
- लेकिन यह शिक्षा अक्सर अन्य विषयों से अलग-थलग हो जाती है, जिससे अंतर-पेशेवर शिक्षा पर असर पड़ता है।
- फिर भी, आज नर्सें मास्टर्स और डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त कर रही हैं।
आज का नर्सिंग नेतृत्व सामूहिकता, योग्यता और बेहतर परिणामों पर केंद्रित है।
नर्सिंग : कल (भविष्य)
भविष्य की नर्सिंग कई नए बदलावों से प्रभावित होगी:
- राजनीतिक परिदृश्य और बेहतर जागरूक समुदाय, जो बदलाव की माँग करेंगे।
- महिलाएँ और ऊँचे पदों पर जाएँगी, लेकिन प्रश्न रहेगा – क्या महिलाएँ कार्यस्थल पर एक-दूसरे का समर्थन करेंगी?
- आने वाली पीढ़ी कार्य-जीवन संतुलन और लचीली कार्य परिस्थितियाँ माँगेगी।
- वर्चुअल ऑफिस और डिजिटल प्रणालियाँ सामान्य होंगी।
- नर्सिंग नेतृत्व की शैली और अपेक्षाएँ बदलेंगी। युवा नर्सें अधिक मुखर होंगी और परिवर्तन की गति तेज चाहेंगी।
टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य सेवाएँ
- टेक्नोलॉजी बड़ा परिवर्तनकारी कारक होगी।
- ऑनलाइन चेक-इन अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुँचेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स रोगियों को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री तक पहुँच देंगे।
- अस्पतालों और क्लीनिकों को अपने क्लीनिकल और क्वालिटी परिणाम सार्वजनिक करने होंगे, ताकि मरीज चुन सकें।
- स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी और मरीज क्वालिटी व कीमत देखकर प्रदाता चुनेंगे।
नर्सिंग शिक्षा का भविष्य
- छात्रों को नवीनतम उपकरण और डिजिटल सामग्री मिलेगी। किताबें और भारी बैग अतीत बन जाएँगे।
- नर्सें बेहतर शिक्षित होंगी और उच्च वेतन की माँग करेंगी।
- बढ़ते विधिक मामलों के चलते नैदानिक दक्षता अहम होगी।
- रोगी-नर्स संबंध बदलेंगे, रोगी अधिक जानकारी और फॉलो-अप की माँग करेंगे।
- परिवार देखभाल में अधिक शामिल होंगे।
- संस्थागत देखभाल केवल तीव्र देखभाल तक सीमित होगी, और मरीजों की रुकने की अवधि घटेगी।
- होम केयर की माँग बढ़ेगी।
निष्कर्ष
हर युग अपने साथ उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ लाता है।
- कल : साहस, महिलाओं का सशक्तिकरण और नर्सिंग शिक्षा का उत्थान।
- आज : नवाचार, करियर प्रगति, अंतर्राष्ट्रीयकरण, साक्ष्य-आधारित प्रैक्टिस और शोध।
- कल (भविष्य) : प्रौद्योगिकी, कार्य-जीवन संतुलन, बदलती स्वास्थ्य सेवाएँ और सशक्त मरीज एवं समुदाय।